पा लूँगा मंजिल को

अरमान मेरे बहुत सारेअधुरा पड़ रहे हैं अबइतने सारे सिलसिलेचारो ओ़र से घेर रहें हैविश्वास हो रहा है गायब। जा नहीं पा रहा हूँ आगेदिख रहे है कई रास्ते अबकिस ओ़र जाना है मुझेमेरे सपनों को पुरा करनेखोज का अंत होगा कब? सहारा देगा भगवान् मेरेदोस्त भी होंगे मेरे साथआगे जो आए नसीब मेंदुःख मुझको … Read moreपा लूँगा मंजिल को